top of page

Jay Ganesh Deva | Full Song

  • Writer: Sanatan Bhakti
    Sanatan Bhakti
  • Jun 1, 2025
  • 1 min read



(मुखड़ा):

वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥

 

जय गणेश देवा, जय गणेश देवा,

विघ्नहर्ता मंगलकर्ता, कर दो कृपा सदा॥

 

(अंतरा 1):

लड्डू के संग मोदक प्यारे, मन मंदिर में तू ही बिराजे।

दीनों की है सुनता पुकारे, दुख हरता तू सब हमारे॥

एकदंत, चार भुजाधारी, सिंधु जैसी शांति तुम्हारी।

रिद्धि सिद्धि संग में आये, जहां तुम्हारा वास समाए॥

 

(अंतरा 2):

तेरा नाम लूँ हर सवेरे, सफल हो जाएं मेरे फेरे।

मन को दे तू शक्ति - धैर्य, मिटे जीवन के सारे कलेश।

बुद्धि - विवेक का दे वरदान, बना दे जीवन आसान।

तेरी कृपा जीवन में छाए, सौभाग्य स्वयं द्वार पर आए।

 

(अंतरा 3):

विद्या बुद्धि के तुम हो दाता, तुम जगत के भाग्यविधाता।

मूढ़ को तुम मार्ग दिखाते, भक्तों के तुम काज बनाते।

हर जन में हो तेरी छाया, तेरे बिना ना कोई उपाया।

सच्चे मन जब तुझको ध्याए, तब उसका जीवन फल जाए।

  

(अंतरा 4):

तेरे आशीष से है जीवन, तेरे आदेश पे ही संपन्न।

तू ही आरंभ - तू ही है अंत, तेरे बिना सब सूना तंत।

तेरा पूजन करूँ मैं मनभावन, तू ही पथ दिखा दे पावन।

हर संकट से तू उबारे, भवसागर से पार उतारे।

 

(समापन):

हे गजानंद देवा, कर दो अब कृपा।

तेरे चरणों में शांति मिले, यही है प्रार्थना॥

 

Comments


bottom of page